भारत के अंधकार युग में पुनर्जागरण काल के क्रांति सूर्य महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती, कानपुर के आदर्श पार्क-बर्रा में धूम धाम के सम्मानपूर्वक मनाई गई।
कार्यक्रम मे संचालन कर रहे राजेश आजाद ने कहा कि वर्तमान शिक्षण पाठ्यक्रमों मे पाखंड को घुसेडा जा रहा और युवाओं में अवैज्ञानिक चिंतन को बढावा देने के लिए डार्विनवाद व मानव-विकास क्रम को हटाया जा रहा। मोक्ष व पुनर्जन्म पर कोर्स लाए जा रहे। हजारों प्राईमरी विद्यालयों को बंद किया जा रहा और विश्वगुरु बनने का सपना दिखाया जा रहा।

उदयराज ने कहा कि भारत के मध्यकाल मे व्याप्त कुरीतियों,पाखंड व अशिक्षा के अंधकार से समाज के बडे तबके को बाहर लाने वाले ज्योतिबा जी प्रकाशपुंज बनकर आए।
सदियों से वंचित समाज के लिए व स्त्रियों के लिए बंद शिक्षा के दरवाजों को खोला, उनमें स्वाभिमान,नयी चेतना लाने को “गुलामगिरी” व “किसान का कोडा” जैसी पुस्तकें लिखीं।
उनके समाज सुधार के अद्वितीय प्रयासों से प्रभावित होकर ही सन 1868 में उन्हें महाराज सयाजी गायकवाड द्वारा “महात्मा” की उपाधि से नवाजा गया।

प्रदीप पटेल ने शिक्षा के व्यवसायीकरण निजीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उच्च व माध्यमिक शिक्षा को आमजन की पहुंच से दूर कर दिया जा रहा, कोर्सेस की फीसें कई गुना तक बढा दी गई ।
संस्कारशाला चलाने वाल, शैलेन्द्र सचान जी ने भी बालमन में ईश्वर चमत्कार व अलौकिक जैसी अवधारणाऐं स्थापित करने को टीवी सीरियलों व फिल्मों का सहारा लिए जाने पर चिंता व्यक्त की। अपने आस पडोस के गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए सबसे सहयोग की अपील की।

कार्यक्रम मे मुख्य रूप से अर्जक संघ, युवा भारत के साथियों..शैलेन्द्र सचान, रामशंकर, प्रदीप पटेल, सुनील यादव ,एस एन सिंह, विक्रांत सिंह, सुनील कटियार, उदयराज, भोला यादव, आर बी चौधरी, राजू रावत, साहिल वर्मा, शैलेश कुमार व प्रभात कुशवाहा सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।
